आज मम्मी ने पढाई के लिए बहुत लम्बा लेक्चर दिया। फ़िर कम्प्युटर क्लास (java) से आने के बाद मम्मी और राम चन्द्र भैया ने रोज पढाई ना करने के लिये बहुत डाटा । उसके बाद मै सो गयी। २ घण्टे बाद जब उठी तो पढाई मे जुट गयी। मेरे भाई (देवेन्द्र) ने फिजिक्स का एक चेप्टर कम्प्लीट करवाया और उसके बाद तुरन्त लाइट चली गयी ।
लाइट जाते ही मेरी मम्मी (जो की सोइ हुई थी) कि आख खुल गयी।
गरमी कि वजह से मम्मी ने भैया को दरवाजा और खिडकी खोलने को कहा।
बाहर देखा तो आंधी आने के आसार नज़र आ रहे थे। तभी मम्मी को याद आया कि छत पर तो गेहु फैला हुआ है।
हम सब तुरन्त छत पर दोडे बहुत मुश्किल से तो सारा फ़ैला हुआ गेहूँ उठा सके।
कभी कभी तो हवा ईतनी तेज़ हो जाती कि लगता था कि हमे ही ले उडेगी ।
बाद में हमने सोचा कि अगर मम्मी न होती तो आज तो सारा गेहूं ही उड गया होता ।
इलाहाबाद में रह रहे ब्लोगरो को तो इस आंधी का पता ही होगा ।
लेकिन बाद में मौसम साफ हो गया शाम को हम सब ने चिप्स और चाय का नाश्ता किया।
मेरे कजिन्स भी इस वक्त आये हुए है गरमी कि छुट्टीया जो चल रही है।
उन्के साथ खेला और बहुत मजा किया। उसके बाद बारिश में थोडा सा भीगा।
और फिर पढाई में जुट गयी।
हीरो पुक की सवारी सिर्फ़ एक ही दिन नसीब हुई उसके बाद से तो किसी के पास टाईम ही नही रहता।
आप सब के कमेन्ट्स और सुझाव के लिये धन्यवाद।
ये हीरो पुक पुरानी है दीदी की, वो तो अब बंगलौर्र (बंगलूर) मे रहती हैं, मुझे नयी गाड़ी तो 10th पास करने के बाद ही मिलेगी। अब तक तो बनना बन्द ही हो गयी होगी।
इस बार कि छुट्टियाँ तो लगता है ऐसे ही बीत जाएंगी पढाई और ब्लौगिन्ग करते हुए।

