जावा इस नाम से तो आप सभी परीचित होंगे। आजकल बहुत मशहूर है यह कम्प्यूटर की भाषा।
और अब बेसिक और c++ के बाद इसे छात्रो के उपर लाद दिया गया है।
वैसे तो यह अब तक कि सारी भाषाओ से ज्यादा अच्छी और ज्यादा विकसित है।
इसमें पहले कि programming की तरह लम्बा लम्बा calculation नही करना पड्ता है।
आजकल इस भाषा की हर छेत्र में बहुत मांग है इसी वजह से सभी स्कूलो मे यह इस्तेमाल कि जाती है।
आजकल मैं भी इसी का अध्ययन कर रही हूं तो सोचा आप सब को भी इससे परिचित करा दूं।

इस भाषा को अगर blue j पर सीखा जाये तो यह ज्यादा आसान लगती है।
लेकिन इसके लिये हमारे कमप्यूटर पर java2sdk भी इन्स्टाल होना चाहिये।
हमे यह इन्टरनेट पर आसानी से मिल जाता है।
उम्मीद है मेरी इस जानकारी से किसी को तो लाभ होगा।

एक बात और, आज साल का सबसे बड़ा दिन होगा २१ जून है न।

 

जब चिकन पॉक्स हुआ था
जब चिकन पॉक्स हुआ था। दवाई लेने के लिये इन्तज़ार कर रहे थे।

मेरे बाद घर मे भैया और दीदी को भी हो गया था।
डॉक्टर ने बोला था, अच्छा है सबको एक साथ ही हो गया। जो भी हो अब शायद फ़िर कभी नही होना चाहिये।

लेकिन ’सबसे अच्छी तारीख’ आज के अमर उजाला मे छपी कविता है जो मुझे बहुत पसन्द आयी।

थोड़ा सा आसमान थोड़ी-सी हवा
थोड़ी सी आहट
बची रहती है हर तारीख में
यही कहीं है वे लचीली तारीखें
वे हवादार जगहें
जहां हम सब से ज्याद जीवित होते हैं
शब्दों को स्वाद में बदलते हुए
नामों को चेहरों में
और रंगो को संगीत में

वर्ष अपनी गठरी में लाते हैं
असंख्य तारीखें
और उनहे फैला देते है पृथ्वी पर
तारीखें तनती हैं
तमतमाये चेहरों की तरह
इतवार की तमाम तारीखें घूरती हैं
लाल आखों से
तारीखें चिल्लाती हैं भूख
तारीखें चिल्लाती हैं न्याय

कुछ ही  तारीखें हैं जो निर्जन रेहती हैं
पुराने घरों की तरह
उदास काली खोखली तारीखें
जिनमें शेष नहीं हैं ताकत
जो बर्दाश्त नहीं कर पाती बोझ

कुछ ही  तारीखें हैं
जो पिछले महीनों पिछले वर्षो की
तारीखें होती हैं नदी के किनारो पर
भाग की तरह छूटी हुइ

सबसे अच्छी तारीख है वह
जिस पर टंगे रहते हैं घर भर के
धुले कपड़े जिसमें फैलती होती है
भोजन की गरम खुशबू जिसमें फूल पकते हैं
जिसमे रखी होती है चिटिठ्यां और यात्राएं


सबसे अच्छी तारीख है वह
जिसमें बर्फ गिरती है और आग जलती है
जो पानी की तरह चमकती है  धूप में
इनसे भी अच्छी तारीख है वह
जो खाली रेहती है
जिसे हम काम से भरते हैं
वह तारीख जो बाहर रेहती है कैलेंडर के

-मंगलेश डबराल

कई दिनो से ब्लोग पर कुछ लिखने का मौका ही नही मिला।

परसों बुखार था और कल ही मुझे पता चला की मुझे chicken pox है।
अब कल डाक्टर को दिखाने जाना है।
chicken pox पेहले मेरे कज़ीन भाई को यही कुछ १ हफ्ता पेहले हुआ था।
फिर ये मुझे हुआ और आज मम्मी ने बताया की यह मेरी कज़ीन सिस्टर को भी हो गया है (मम्मी २ दिन से बनारस मे हैं) ।
अब मै आप सब को भी खबरदार कर दूं बच कर रहीयेगा।
आप सब के कमेंट मुझे और लिखने के लिये बहुत प्रोत्साहित करते हैं।
आप सभी के कमेंट के लिये धन्यवाद।
आगे की पोस्ट ठीक होने के बाद ।