On the Occassion of INDIA's 61st INDEPENDENCE DAY

श्री राम नरेश त्रिपाठी की रचना मेरी काव्य चन्द्रिका पुस्तक से।

अतुलनीय जिनके प्रताप का,
साक्षी है प्रतयक्ष दिवाकर।
घूम घूम कर देख चुका है,
जिनकी निर्मल किर्ति निशाकर।

देख चुके है जिनका वैभव,
ये नभ के अनंत तारागण।
अगणित बार सुन चुका है नभ,
जिनका विजय-घोष रण-गर्जन।

शोभित है सर्वोच्च मुकुट से,
जिनके दिव्य देश का मस्तक।
गूंज रही हैं सकल दिशायें,
जिनके जय गीतों से अब तक।

जिनकी महिमा का है अविरल,
साक्षी सत्य-रूप हिमगिरिवर।
उतरा करते थे विमान-दल,
जिसके विसतृत वछ-स्थल पर।

jai-hind

सागर निज छाती पर जिनके,
अगणित अर्णव-पोत उठाकर।
पहुंचाया करता था प्रमुदित,
भूमंडल के सकल तटों पर।

नदियां जिनकी यश-धारा-सी,
बहती है अब भी निशी-वासर।
ढूढो उनके चरण चिहन भी,
पाओगे तुम इनके तट पर।

सच्चा प्रेम वही है जिसकी
तृपित आत्म-बलि पर हो निर्भर।
त्याग बिना निष्प्राण प्रेम है,
करो प्रेम पर प्राण निछावर।

देश-प्रेम वह पुण्य छेत्र है,
अमल असीम त्याग से वि्लसित।
आत्मा के विकास से जिसमे,
मनुष्यता होती है विकसित।

सभी को ६१वें स्वन्त्रता दिवस की शुभकामनायें।

8 comments

  1. Udan Tashtari // August 15, 2008 at 6:09 AM  

    बहुत आभार इस रचना को यहाँ प्रस्तुत करने का.

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

  2. दिनेशराय द्विवेदी // August 15, 2008 at 6:16 AM  

    आजाद है भारत,
    आजादी के पर्व की शुभकामनाएँ।
    पर आजाद नहीं
    जन भारत के,
    फिर से छेड़ें संग्राम
    जन की आजादी लाएँ।

  3. लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` // August 15, 2008 at 6:49 AM  

    पढ लिया !
    वँदे मातरम !
    - लावण्या

  4. समय चक्र // August 15, 2008 at 9:03 AM  

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं...

  5. राजीव रंजन प्रसाद // August 15, 2008 at 9:52 AM  

    अद्धभुत रचना..


    स्वाधीनता दिवस की शुभकामनायें..


    ***राजीव रंजन प्रसाद

    www.rajeevnhpc.blogspot.com
    www.kuhkakona.blogspot.com

  6. alok kumar tewari // August 13, 2010 at 12:39 PM  

    नमस्‍कार आपका यह प्रयास सराहनीय है।नव युवकों में इस सोच का विक‍सित होना ही सच्‍ची आजादी है अन्‍यथा हम जिस स्थिति में है -----------------

  7. alok kumar tewari // August 13, 2010 at 12:39 PM  

    नमस्‍कार आपका यह प्रयास सराहनीय है।नव युवकों में इस सोच का विक‍सित होना ही सच्‍ची आजादी है अन्‍यथा हम जिस स्थिति में है -----------------

  8. Unknown // December 1, 2010 at 6:44 PM  

    सौम्या यह बहुत ही सुंदर रचना है. इसे प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद. इस कविता का नाम क्या है