आज हमने अपनी गुगल प्रोफाइल बना ली है और बज़्ज़ भी ज्वाइन कर लिया, देखती हूँ कितने फ़ॉलोवर मिलते हैं हमारे, लेकिन अभी समय नही है क्योकि सोमवार से ही परीक्षायें होने वाली हैं।
इस बीच अपने कम्प्यूटर पर Windows 7 और Win XP दोनों मे Turbo C भी इन्स्टाल किया।
गुगल प्रोफाइल और बज़्ज़!
Saturday, October 02, 2010 | C, C++, Turbo C, Win XP, Windows 7 | 5 comments »कल रक्षाबन्धन था, दीदी (दिव्या पाण्डेय) भी घर आ गयी हैं ४ से भी जादा महीनों के बाद, ३ दिन की छुट्टियों में। उन्होने हाल ही मे गुड़गाँव मे ज्वाइन किया है, पहले बंगालूरू मे थीं।
फोटो मे आयुश और भैया (श्री देवेन्द्र पाण्डेय) है।
ये मेरा भतीजा आयुश है।
स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में- On the Occassion of 61st Independence Day
Friday, August 15, 2008 | स्वतंत्रता दिवस | 8 comments »On the Occassion of INDIA's 61st INDEPENDENCE DAY
श्री राम नरेश त्रिपाठी की रचना मेरी काव्य चन्द्रिका पुस्तक से।
अतुलनीय जिनके प्रताप का,
साक्षी है प्रतयक्ष दिवाकर।
घूम घूम कर देख चुका है,
जिनकी निर्मल किर्ति निशाकर।
देख चुके है जिनका वैभव,
ये नभ के अनंत तारागण।
अगणित बार सुन चुका है नभ,
जिनका विजय-घोष रण-गर्जन।
शोभित है सर्वोच्च मुकुट से,
जिनके दिव्य देश का मस्तक।
गूंज रही हैं सकल दिशायें,
जिनके जय गीतों से अब तक।
जिनकी महिमा का है अविरल,
साक्षी सत्य-रूप हिमगिरिवर।
उतरा करते थे विमान-दल,
जिसके विसतृत वछ-स्थल पर।
सागर निज छाती पर जिनके,
अगणित अर्णव-पोत उठाकर।
पहुंचाया करता था प्रमुदित,
भूमंडल के सकल तटों पर।
नदियां जिनकी यश-धारा-सी,
बहती है अब भी निशी-वासर।
ढूढो उनके चरण चिहन भी,
पाओगे तुम इनके तट पर।
सच्चा प्रेम वही है जिसकी
तृपित आत्म-बलि पर हो निर्भर।
त्याग बिना निष्प्राण प्रेम है,
करो प्रेम पर प्राण निछावर।
देश-प्रेम वह पुण्य छेत्र है,
अमल असीम त्याग से वि्लसित।
आत्मा के विकास से जिसमे,
मनुष्यता होती है विकसित।
सभी को ६१वें स्वन्त्रता दिवस की शुभकामनायें।
साक्षी है प्रतयक्ष दिवाकर।
घूम घूम कर देख चुका है,
जिनकी निर्मल किर्ति निशाकर।
देख चुके है जिनका वैभव,
ये नभ के अनंत तारागण।
अगणित बार सुन चुका है नभ,
जिनका विजय-घोष रण-गर्जन।
शोभित है सर्वोच्च मुकुट से,
जिनके दिव्य देश का मस्तक।
गूंज रही हैं सकल दिशायें,
जिनके जय गीतों से अब तक।
जिनकी महिमा का है अविरल,
साक्षी सत्य-रूप हिमगिरिवर।
उतरा करते थे विमान-दल,
जिसके विसतृत वछ-स्थल पर।
सागर निज छाती पर जिनके,
अगणित अर्णव-पोत उठाकर।
पहुंचाया करता था प्रमुदित,
भूमंडल के सकल तटों पर।
नदियां जिनकी यश-धारा-सी,
बहती है अब भी निशी-वासर।
ढूढो उनके चरण चिहन भी,
पाओगे तुम इनके तट पर।
सच्चा प्रेम वही है जिसकी
तृपित आत्म-बलि पर हो निर्भर।
त्याग बिना निष्प्राण प्रेम है,
करो प्रेम पर प्राण निछावर।
देश-प्रेम वह पुण्य छेत्र है,
अमल असीम त्याग से वि्लसित।
आत्मा के विकास से जिसमे,
मनुष्यता होती है विकसित।
सभी को ६१वें स्वन्त्रता दिवस की शुभकामनायें।
Space Craft Video स्पेश क्राफ़्ट के अन्दर का विडियो।
Wednesday, July 30, 2008 | SpaceCraft, Video | 4 comments »ये विडियो दीदी ने ई-मेल से भेजा था। मुझे इन्टेरेस्टिन्ग लगा इसलिये ब्लॉग पर भी लगा दे रही हूँ।
इस विडियो मे तो सब लोग उड़ते हुए लग रहे हैं।
इस विडियो मे तो सब लोग उड़ते हुए लग रहे हैं।
बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं, स्कूल खुल गये हैं न, इसलिये। आज कल दीदी बहुत सारे मेल भेजती रहती हैं, तो सोचा कुछ बहुत अच्छे वाले अपने ब्लॉग पर भी डाल दूं :)।
Subscribe to:
Posts (Atom)






